1 एक रोज़-
मैं भूल गया-
अपना नाम,
अच्छा लगा-
'नेमप्लेट' से इंसान बनना।
मैं भूल गया-
अपना नाम,
अच्छा लगा-
'नेमप्लेट' से इंसान बनना।
2.
गुमशुदा हुए हैं-
जबसे-
ख़्वाब मेरी आंखों से-
नींद,
बहुत अच्छी आती है मुझे।
जबसे-
ख़्वाब मेरी आंखों से-
नींद,
बहुत अच्छी आती है मुझे।
3.
अच्छा है -
आइने में दिखती हैं-
सिर्फ शक्लें-
मन जो दिखता-
देखने को ना मिलते-
कहीं आइने।
आइने में दिखती हैं-
सिर्फ शक्लें-
मन जो दिखता-
देखने को ना मिलते-
कहीं आइने।
4.
किसी डस्टबिन सी लगती हैं-
बदनाम गलियां मुझे-
जिनकी वजह से-
मेरा शहर-
देखो-
कितना साफ है!
बदनाम गलियां मुझे-
जिनकी वजह से-
मेरा शहर-
देखो-
कितना साफ है!
5.
आदमी -
शहर आता है,
बड़ा आदमी बनने।
कुछ दिनों बाद-
'इश्तहार' बन जाता है।
शहर आता है,
बड़ा आदमी बनने।
कुछ दिनों बाद-
'इश्तहार' बन जाता है।

1 comment:
nishabd kar diya aapne vivek ji.... Behtarin kshanikae.
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